
इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि पीठ नाराज नहीं हो तो वह इसे आगे बढ़ाएं। इस पर सीजेआई गोगोई ने उक्त टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि हम आज या कल यहां तक शुक्रवार को भी किसी अन्य मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। आपकी शिकायत है कि आप जैसे वरिष्ठ वकील की आवाज नहीं सुनी गई, हम अब आपकी बात सुनेंगे। इसके बाद पीठ ने पूरा दिन इसी मामले की सुनवाई की।
पीठ में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना भी शामिल हैं। हालांकि पीठ ने कुमार की याचिका पर सुनवाई शुरू करते हुए याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट 130 करोड़ लोगों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए है जोकि दुनिया की जनसंख्या की आधी आबादी है। हर व्यक्ति यह कहता दिखता है कि उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।
साथ ही पीठ ने यह भी बताने की कोशिश की कि कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत संसद को निर्देशित नहीं कर सकता है क्योंकि संसद अपने क्षेत्र में संप्रभु है और सुप्रीम कोर्ट अपने क्षेत्र में ही संप्रभु है। पीठ ने कहा कि कोर्ट केंद्र सरकार को मानवीय गरिमा को बनाए रखने के अपने संवैधानिक वादे का सम्मान करने के लिए एक रिट जारी नहीं कर सकती है।
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