Thursday, January 31, 2019
चुनाव से पहले 'महामुकाबला', संसद का बजट सत्र आज से शुरू
लोकसभा चुनाव की उलटी गिनती के बीच आज से बजट सत्र शुरू हो रहा है. राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ इस सत्र की शुरुआत होगी. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद संसद के केन्द्रीय कक्ष में राज्यसभा और लोकसभा के संयुक्त सदन को संबोधित करेंगे और सरकार की उपलब्धियां, दशा और दिशा बताएंगे...इसके बाद एक फरवरी को सरकार अंतरिम बजट पेश करेगी. अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार के पास ये आखिरी मौका है, जब वो कुछ लोक-लुभावन फैसले कर जनता का दिल जीतने की बड़ी कोशिश कर सकती है.
सरकारी स्कूल के मिड डे मील में मिला सांप, बावर्ची की सावधानी से बची बच्चों की जान
स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन का कहना है कि महिला बावर्ची की सतर्कता के चलते ही आज कई बच्चों की जान बच गई
नांदेड़ः महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के एक सरकारी स्कूल के मिड डे मील में सांप का बच्चा मिलने से पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया, लेकिन बावर्ची की सावधानी के चलते कोई भी बड़ा हादसा होने से टल गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक वक्त रहते यह बात बावर्ची महिला को पता चल गई और उसने बच्चों को खाना नहीं परोसने दिया, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया. घटना नांदेड के हदगाव तालुका के गारगव्हान गांव की है, जहां जिला परीषद की स्कूल में मिड डे मील में बच्चों को खाना परोसने की तैयारी की जा रही थी कि तभी बावर्ची की नजर खाने में पड़े सांप के बच्चे पर पड़ गई, जिसके बाद बच्चों को खाना नहीं परोसा गया और कई बच्चों की जान बच गई.
मिली जानकारी के मुताबिक सरकारी योजना के तहत महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को खाना परोसा जाना था, जिसके लिए स्कूल की महिला बावर्ची ने खिचड़ी बनाई थी. महिला बावर्ची के मुताबिक यह खाना एक टीन शेड के नीचे बनाया जाता है. महिला को शक है कि सांप का बच्चा टीन शेड से ही नीचे खाने के बर्तन में गिर गया होगा. जिसके बाद जब महिला की नजर खिचड़ी में पड़े सांप के बच्चे पर पड़ी तो उसने पूरी खिचड़ी फेंक दी और वापस से बच्चों के लिए खाना बनाया.
स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन का कहना है कि महिला बावर्ची की सतर्कता के चलते ही आज कई बच्चों की जान बच गई. अगर समय रहते उसने खाने में सांप न देखा होता तो शायद अनर्थ हो जाता. वहीं खाने में सांप का बच्चा होने की खबर तब सामने आई जब बच्चों ने घर जाकर अपने-अपने माता-पिता को यह बात बताई. बता दें इस सरकारी प्राथमिक स्कूल में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा के 160 बच्चे पढते है. जिनके लिए दोपहर के खाने के लिए खिचड़ी बनाई गई थी. बच्चों के लिए यह खाना स्कूल के टीन शेड के नीचे बनाया जा रहा था, जिससे कहीं से यह सांप आकर खिचड़ी में गिर गया.
मामला सामने आने के बाद स्कूल कमिटी ने बीडीओ ( ब्लॉक डेवलपमेन्ट ऑफीसर) को शिकायत की है. अब मामले की जांच की जा रही है. शिक्षणाधिकारी ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. इस घटना से फिर से एक बार मिड डे मील बनाते हुए सावधानी नहीं बरती जाती यह साफ हो गया है. बता दें यह पहली बार नहीं है जब मिड डे मील में इस तरह की गड़बड़ियां सामने आई हों. इससे पहले भी मिड डे मील में मिलने वाले खाने की क्वालिटी हमेशा ही विवादों में रही है.
लखनऊ: ED ने खोली स्मारक घोटाला की फाइल, 6 ठिकानों पर छापेमारी, बढ़ेंगी मायावती की मुश्किलें
बसपा मुखिया मायावती के कार्यकाल के दौरान लखनऊ और नोएडा में स्मारक का निर्माण किया गया था. इसमें करीब 1400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था
लखनऊ: हमीरपुर खनन घोटाले के बाद ईडी की टीम ने लखनऊ में स्मारक घोटाले में बड़ी छापेमारी की है. कई सालों से ठंडे बस्ते में पड़ी स्मारक घोटाला जांच अब प्रवर्तन निदेशालय ने शुरू कर दी है. प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार (31 जनवरी) को लखनऊ में 6 ठिकानों पर छापेमारी की. यह छापेमारी 1400 करोड़ के स्मारक घोटाले से जुड़ी है. ईडी की छापेमारी गोमतीनगर और हजरतगंज इलाके में हुई. गौरतलब है कि स्मारक घोटाला का संबंध उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से है. इसलिए ये आशंका जताई जा रही है कि जांच की आंच बसपा सुप्रीमो तक पहुंच सकती है.
आपको बता दें कि बसपा मुखिया मायावती के कार्यकाल के दौरान लखनऊ और नोएडा में स्मारक का निर्माण किया गया था. इसमें करीब 1400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था. सतर्कता अधिष्ठान ने 1400 करोड़ (14 अरब) के स्मारक घोटाले की जांच की थी. जांच के लिए विजिलेंस में सात इंस्पेक्टर की एक एसआईटी का भी गठन किया गया था. बताया जा रहा है कि विजिलेंस जांच की पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही ईडी ने कार्रवाई शुरू की है.
लखनऊ: हमीरपुर खनन घोटाले के बाद ईडी की टीम ने लखनऊ में स्मारक घोटाले में बड़ी छापेमारी की है. कई सालों से ठंडे बस्ते में पड़ी स्मारक घोटाला जांच अब प्रवर्तन निदेशालय ने शुरू कर दी है. प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार (31 जनवरी) को लखनऊ में 6 ठिकानों पर छापेमारी की. यह छापेमारी 1400 करोड़ के स्मारक घोटाले से जुड़ी है. ईडी की छापेमारी गोमतीनगर और हजरतगंज इलाके में हुई. गौरतलब है कि स्मारक घोटाला का संबंध उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से है. इसलिए ये आशंका जताई जा रही है कि जांच की आंच बसपा सुप्रीमो तक पहुंच सकती है.
आपको बता दें कि बसपा मुखिया मायावती के कार्यकाल के दौरान लखनऊ और नोएडा में स्मारक का निर्माण किया गया था. इसमें करीब 1400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था. सतर्कता अधिष्ठान ने 1400 करोड़ (14 अरब) के स्मारक घोटाले की जांच की थी. जांच के लिए विजिलेंस में सात इंस्पेक्टर की एक एसआईटी का भी गठन किया गया था. बताया जा रहा है कि विजिलेंस जांच की पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही ईडी ने कार्रवाई शुरू की है.
Wednesday, January 30, 2019
ATM से पैसे चुराने का नया तरीका, Aadhaar Card से यूं चुराए जा रहे हैं हज़ारों
ATM से पैसे चुराने का अब नया तरीका आ चुका है. इसके लिए ना आपके एटीएम कार्ड (ATM Card) चाहिए और ना ही कोई पासवर्ड, बल्कि आपके आधार कार्ड (Aadhaar Card) की बायोमैट्रिक (Bio metric) जानकारी ही काफी है.
नई दिल्ली:
ATM से पैसे चुराने का अब नया तरीका आ चुका है. इसके लिए ना आपके एटीएम कार्ड (ATM Card) चाहिए और ना ही कोई पासवर्ड, बल्कि आपके आधार कार्ड (Aadhaar Card) की बायोमैट्रिक (Bio metric) जानकारी ही काफी है. जी हां, आपने आधार कार्ड (Aadhaar Card) बनवाते हुए बायोमैट्रिक मशीन (Bio Metric machine) में अपने फिंगर प्रिंट (Fingerprint) दिए होंगे. इन्हीं फिंगर प्रिंट की मदद से आपका पैसा एटीएम (ATM) में चोरी हो रहा है.
हरियाणा के जिंद में रहने वाले 40 साल के विक्रम के फोन पर एक मैसेज आया. उस मैसेज में लिखा था कि उनके फिंगरप्रिंट की मदद से दिल्ली के एक माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) से 1000 रुपये का निकाले गए हैं. इस घटना के एक हफ्ते बाद ही इसी तरह के माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) से 7500 रुपये निकाले गए. इस बार पैसे बिहार से निकले.
आपको बता दें, माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) से पैसे निकालने के लिए पिन या पासवर्ड नहीं, बल्कि आधार/डेबिट कार्ड (Aadhaar/Debit Card)के साथ-साथ फिंगरप्रिंट की जरुरत पड़ती है.

Micro ATM
जानिए आखिर ये हुआ कैसे?
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम लोगों के आधार कार्ड (Aadhaar Card) बनवाने का काम करता है. हैकर्स ने UIDAI सॉफ्टवेयर पर विक्रम की पर्सनल आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर लॉग-इन कर फेक कार्ड्स बनवाए. हैकर्स ने विक्रम की बायोमैट्रिक जानकारी के जरिए माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) से पैसे चुराए और बाकि सरकारी वेबसाइट्स पर भी लॉग-इन किया. हालांकि, अब विक्रम ने इस घटना की शिकायत की और अपनी बायोमैट्रिक्स को लॉक (Bio Metric Lock) करवाया.
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम लोगों के आधार कार्ड (Aadhaar Card) बनवाने का काम करता है. हैकर्स ने UIDAI सॉफ्टवेयर पर विक्रम की पर्सनल आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर लॉग-इन कर फेक कार्ड्स बनवाए. हैकर्स ने विक्रम की बायोमैट्रिक जानकारी के जरिए माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) से पैसे चुराए और बाकि सरकारी वेबसाइट्स पर भी लॉग-इन किया. हालांकि, अब विक्रम ने इस घटना की शिकायत की और अपनी बायोमैट्रिक्स को लॉक (Bio Metric Lock) करवाया.
आप कैसे इससे बच सकते हैं?
अपनी बायोमैट्रिक जानकारी को लॉक करने के लिए (https://resident.uidai.gov.in/biometric-lock) पर जाएं. यहां अपना आधार कार्ड डालें और रजिस्टर नंबर पर आए ओटीपी (OTP) मिलेगा. इसे लॉक कर दें. इसके बाद आपके फिंगरप्रिंट को कोई भी माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) या कहीं भी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा.
अपनी बायोमैट्रिक जानकारी को लॉक करने के लिए (https://resident.uidai.gov.in/biometric-lock) पर जाएं. यहां अपना आधार कार्ड डालें और रजिस्टर नंबर पर आए ओटीपी (OTP) मिलेगा. इसे लॉक कर दें. इसके बाद आपके फिंगरप्रिंट को कोई भी माइक्रो-एटीएम (Micro-ATM) या कहीं भी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा.
इस शख्स ने नौकरी में नहीं ली छुट्टियां, रिटायरमेंट पर मिलेंगे पूरे 21 करोड़
अगर आप भी ऑफिस में नौकरी करने के दौरान छुट्टियां नहीं लेते तो इससे आपको कितना फायदा हो सकता है. शायद ये बात आपसे पूछी जाए तो आपका जवाब 50 हजार या लाख रुपये में होगा.

नई दिल्ली : अगर आप भी ऑफिस में नौकरी करने के दौरान छुट्टियां नहीं लेते तो इससे आपको कितना फायदा हो सकता है. शायद ये बात आपसे पूछी जाए तो आपका जवाब 50 हजार या लाख रुपये में होगा. लेकिन एक शख्स ने अपनी छुट्टियां नहीं लेने के बदले पूरे 21 करोड़ रुपये कमाए हैं. यह सुनकर भले ही आपको एक बार यकीन न हो लेकिन ये है पूरी तरह सच. दुनियाभर में भारतीयों की काम के प्रति लगन और कार्यशैली की तारीफ की जाती है. अधिकतर भारतीय कर्मचारी अपनी सिक लीव (बीमारी में जी जाने वाली छुट्टियां) का इस्तेमाल नहीं करते और साल के अंत में इन्हें भुना (पैसे लेना) लेते हैं.
नायक को पद्म विभूषण के लिए चुना गया
एक ऐसे ही इंडियन एम्पलाई ने अपनी सिक लीव के बदले 21 करोड़ रुपये कमा लिए. इस शख्स का नाम है अनिल मणिभाई नायक. अनिल मणिभाई नायक ने हाल ही में लार्सन एंड टब्रो (L&T) के नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद से रिटायरमेंट ले लिया है. यहां पर जो छुट्टियां उन्होंने नहीं ली, उनके बदले उन्हें पूरे 21 करोड़ रुपये मिलेंगे. लार्सन एंड टर्बो ग्रुप को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले अनिल मणिभाई नायक को भारत के दूसरे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए चुना गया है.
एक ऐसे ही इंडियन एम्पलाई ने अपनी सिक लीव के बदले 21 करोड़ रुपये कमा लिए. इस शख्स का नाम है अनिल मणिभाई नायक. अनिल मणिभाई नायक ने हाल ही में लार्सन एंड टब्रो (L&T) के नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद से रिटायरमेंट ले लिया है. यहां पर जो छुट्टियां उन्होंने नहीं ली, उनके बदले उन्हें पूरे 21 करोड़ रुपये मिलेंगे. लार्सन एंड टर्बो ग्रुप को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले अनिल मणिभाई नायक को भारत के दूसरे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए चुना गया है.
नायक ने लार्सन एंड टब्रो को 1965 में बतौर जूनियर इंजीनियर ज्वाइन किया था. उन्हें इससे पहले 2009 में पद्म भूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है. एल एंड टी की सालाना रिपोर्ट 2017-18 के अनुसार नायक को अपनी छुट्टियां इस्तेमाल नहीं करने के एवज में 21.33 करोड़ रुपये मिलेंगे. उनकी कुल पेआउट 137 करोड़ से ज्यादा था, जिसमें 2.7 करोड़ रुपये बेसिक सैलरी शामिल है. उनके रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और अन्य लाभ करीब 100 करोड़ रुपये है. आपको बता दें कि नायक गांव के प्राइमरी स्कूल टीचर के पुत्र हैं.
भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाने वाले केजरीवाल का संपत्ति का हिसाब देने से 'तौबा'
ष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने की बात कहने वाले केजरीवाल अब अपनी संपत्ति का हिसाब देने को तैयार नहीं है. दिल्ली की लोकायुक्त जस्टिस रेवा खेत्रपाल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए दूसरी बार नोटिस भेजा है. लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री समेत उनकी सरकार के तमाम मंत्रियों और आप के विधायकों से पूछा है कि आखिर आपने नोटिस के बावजूद अब तक अपनी संपत्ति की जानकारी क्यों नहीं जमा कराई है. जवाब देने की तारीख 27 फरवरी तय है लेकिन इससे पहले ही दिल्ली की सियासत गरमा गई है.
Tuesday, January 29, 2019
मोदी सरकार की अंतिम बजट के 'पिटारें' से निकलेगा 'लोकलुभावन सपनों' का इक्का ?
मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल का अंतिम बजट एक फरवरी को पेश करेगी. इस बार अरुण जेटली चूंकि बीमार है इसीलिए वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल बजट पेश करेंगे. इस साल लोकसभा चुनाव है. अमूमन चुनावी साल में सरकार केवल अपना खर्च चलाने के लिए लेखानुदान पेश करती है लेकिन अरुण जेटली ने साफ किया था कि वो लेखानुदान नहीं, अंतरिम बजट पेश करेंगे. बजट में आम लोगों की नज़रे खासतौर से इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणा पर टिकी होती हैं. इसमें दिलचस्पी सबसे ज़्यादा इस बात की भी होती है कि क्या वित्त मंत्री इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाएंगे.
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अयोध्या मामले में मोदी सरकार भी पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कहा- विवाद सिर्फ 0.313 एकड़ का, बाकी जमीन वापस हो
शीर्ष अदालत ने 1994 के अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. यह मामला अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था.
खास बातें
- मोदी सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
- जमीन के लिए दी याचिका
- अधिग्रहीत जमीन वापस मांगी
नई दिल्ली:
लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या मुद्दे पर अब मोदी सरकार भी कोर्ट पहुंच गई है. केंद्र सरकार की ओर से दाखिल की गई अर्जी में मांग की गई है कि 67 एकड़ जमीन का सरकार ने अधिग्रहण किया था जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था. जमीन का विवाद सिर्फ 0.313 एक़ड़ का है बल्कि बाकी जमीन पर कोई विवाद नहीं है. इसलिए उस पर यथास्थिति बरकरार रखने की जरूरत नहीं है. सरकार चाहती है जमीन का बाकी हिस्सा राम जन्मभूमि न्यास को दिया जाए और सुप्रीम कोर्ट इसकी इज़ाजत दे.सरकारी सूत्रों का कहना है कि नरसिम्हा राव सरकार ने विवादित ०.313 एकड़ भूमि के साथ ही 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. इस्माइल फारुकी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है कि जो जमीन बचेगी उसे उसके सही मालिक को वापस करने के लिए केंद्र सरकार ड्यूटी बाउंड है. इसमें 40 एकड़ ज़मीन राम जन्मभूमि न्यास की है. हम चाहते हैं कि इसे उन्हें वापस कर दी जाए साथ ही वापस करते यह देखा जा सकता है कि विवादित भूमि तक पहुंच का रास्ता बना रहे. उसके अलावा जमीन वापस कर दी जाए.
गौरतलब है कि अयोध्या मामले की नई संवैधानिक 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ सुनवाई कर रही है. न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर इसमें शामिल हैं. ये दोनों राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के लिये पूर्व में गठित तीन सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे. न्यायमूर्ति भूषण और न्यायमूर्ति नजीर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा (अब सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली उस तीन सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे, जिसने 27 सितंबर 2018 को 2:1 के बहुमत से शीर्ष अदालत के 1994 के एक फैसले में की गई एक टिप्पणी को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास पुनर्विचार के लिये भेजने से मना कर दिया था.
शीर्ष अदालत ने 1994 के अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. यह मामला अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था. न्यायमूर्ति नजीर ने बहुमत के फैसले से अलग राय जताई थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दायर हैं. चार दीवानी मुकदमों पर सुनाए गए अपने फैसले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ जमीन को तीन पक्षों--सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था. अयोध्या मामले पर सुनवाई के लिये इस साल आठ जनवरी को गठित पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में न्यायमूर्ति भूषण और न्यायमूर्ति नजीर शामिल नहीं थे. पीठ का पुनर्गठन इसलिये किया गया क्योंकि मूल पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति यू यू ललित ने 10 जनवरी को मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. उन्होंने मामले की सुनवाई में आगे हिस्सा लेने से मना कर दिया था क्योंकि वह 1997 में एक संबंधित मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरफ से एक वकील के तौर पर पेश हुए थे. नयी पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं.
CPM के दफ्तर पर आधी रात में मारा छापा तो IPS के खिलाफ CM ने बैठाई जांच,
आईपीएस जॉन ने 24 जनवरी की मध्य रात्रि को एक मामले में कुछ आरोपियों की तलाश में माकपा के जिला कार्यालय पर छापा मारा था.

आईपीएस अधिकारी चित्रा टेरेसा जॉन.
खास बातें
- CPM के दफ्तर पर आधी रात मारा था छापा
- सीएम ने भी की थी आलोचना
- जांच में मिली क्लीनचिट
केरल (Kerala) की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सत्तारूढ़ पार्टी सीपीएम (CPM)के दफ्तर पर छापा मारने पर एक महिला पुलिस अधिकारी को जांच का सामना करना पड़ा. छापेमारी को लेकर केरल के मुख्यमंत्रीपिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने भी अधिकारी चित्रा टेरेसा जॉन (Chaitra Teresa John) की आलोचना की थी. सीएम ने कहा था कि कुछ निहित स्वार्थों की राजनीति में शामिल लोगों की 'छवि को बिगाड़ने' की प्रवृत्ति रहती है. इसके बाद राज्य सरकार ने युवा अधिकारी चित्रा टेरेसा जॉन के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए थे. लेकिन विभागीय जांच में उन्हें क्लीनचिट मिल गई है.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच में ऐसा कुछ भी नहीं मिला कि उन्होंने कुछ गलती की है. जांच में पाया गया कि पुलिस अधिकारी ने कानूनी ढांचे और मौजूदा नियमों के तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए थे.
आईपीएस जॉन ने 24 जनवरी की मध्य रात्रि को एक मामले में कुछ आरोपियों की तलाश में माकपा के जिला कार्यालय पर छापा मारा था. जॉन के नेतृत्व में पुलिस दल माकपा की युवा इकाई डीवाईएफआई के कुछ नेताओं की तलाश में वहां पहुंचा था जो कथित तौर पर शहर के एक पुलिस थाने पर पथराव की घटना में शामिल थे. इसके बाद पार्टी की जिला इकाई के नेताओं की शिकायत पर जॉन के खिलाफ जांच के आदेश दिये गए.
राज्य विधानसभा में इस मुद्दे पर एक प्रतिवेदन का जवाब देते हुए विजयन ने कहा कि आम तौर पर राज्य में पार्टी कार्यालयों के दफ्तरों पर ऐसी छापेमारी नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में यह जरूरी है कि पार्टी कार्यालयों के सुचारू कामकाज के लिये अनुकूल माहौल बनाया जाए और ऐसे संस्थानों की सुरक्षा को सामान्य रूप से पुलिस के कर्तव्य के तौर पर देखा जाता है.
विजयन ने कहा था, कुछ निहित स्वार्थों का राजनीति में शामिल लोगों की छवि खराब करने की तरफ झुकाव होता है और ऐसे मौके आए हैं जब कुछ लोग इन प्रवृत्तियों का शिकार हुए हैं. एक लोकतांत्रिक समाज ऐसे नजरिये को दुरुस्त करके ही आगे बढ़ सकता है.'
Friday, January 25, 2019
पाकिस्तान में स्थित हैं दो हजार साल पुराने हिन्दू मंदिर, जहां मुसलमान भी झुकाते हैं सिर
ये तो सब जानते हैं कि भारत अपनी संस्कृति, धर्म और मंदिरों के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है। लेकिन ये जानकर आपको जरूर हैरानी होगी कि, हमारा पड़ोसी देश जो एक मुस्लिम बाहुल्य देश है। वहां भी कुछ ऐसे प्रसिद्द हिन्दू मंदिर हैं जिनकी विशेषताओं के बारे में शायद ही आप जानते होंगे। मुसलमान देश होने के बावजूद इन मंदिरों में हिन्दू ही नहीं बल्कि मुसलमान भी सिर झुकाते हैं।

बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज मंदिर अपनी पौराणिक कथा से जाना जाता है। दरअसल इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि विष्णु भगवान ने सती माता का शीश काटने के लिए चक्र फेंका था। उस चक्र से शीश कटकर जिस जगह पर गिरा, वह यही जगह है। दरअसल ये मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान से 120 किलोमीटर की दूरी पर हिंगुल नदी के तट पर स्थित है। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से भी एक है।
क्या है आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन विवाद, कैसे चला कर्ज और कमीशन का खेल
सीबीआई के अनुसार यह आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत को कर्ज देने के बदले बैंक की तत्कालीन सीईओ चंदा कोचर द्वारा घूस लेने का मामला है। घूस की रकम चंदा के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर के खाते में जमा कराई जाती थी। हर बार जितनी राशि का कर्ज चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक से वीडियोकॉन को स्वीकृत किया, उसकी दस प्रतिशत रकम वीडियोकॉन या उसकी सहयोगी कंपनियों द्वारा न्यूपावर के खाते में जमा करा दी जाती थी। सारा काम कई कंपनियों के एक ताल के माध्यम से हो रहा था ताकि जांच एजेंसियों की निगाह से बचा जा सके।
ऐसे चला कर्ज और कमीशन का खेल
- दिसंबर 2008 - वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर और उनका भाई राजीव कोचर साझेदारी में न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी स्थापित करते हैं।
- चंदा कोचर 2009 में आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ बनती हैं।
- जनवरी 2009 - धूत न्यूपावर के अपने 25000 शेयर ढाई लाख रुपये में दीपक कोचर को बेच देते हैं।
- जून 2009 - धूत न्यूपावर से अपना शेयर निकाल कर अपनी कंपनी सुप्रीम एनर्जी में डाल देते है। यानी साझेदारी खत्म।
- मार्च 2010 - धूत की सुप्रीम एनर्जी न्यूपावर को 64 करोड़ रुपये का कर्ज देती है।
- मार्च 2012 - धूत सुप्रीम एनर्जी के सारे शेयर दीपक कोचर के पिनेकल ट्रस्ट को नौ लाख रुपये में बेच देते हैं। यानी कोचर धूत से लिया 64 करोड़ का कर्ज मात्र नौ लाख रुपये में अदा कर देते हैं।
- अप्रैल 2012 - आईसीआईसीआई बैंक वीडियोकॉन समूह की पांच कंपनियों को 3250 करोड़ रुपये का कर्ज देता है।
- अप्रैल 2012 - टैक्स हैवेन माने जाने वाले मारीशस की कंपनी फर्स्टलैंड होल्डिंग्स कोचर की न्यूपावर में 325 करोड़ रूपया डालती है। यानी कर्ज की राशि की दस फीसदी।
- कर्ज की इस रकम में से 2810 रुपये यानी 86 प्रतिशत राशि आज तक अदा नहीं की गई है। बैंक ने 2017 में इसे एनपीए करार दे बट्टे खाते में डाल दिया।
- अप्रैल 2012 - आईसीआईसीआई बैंक वीडियोकॉन समूह की टैक्स हैवन माने जाने वाले केमैन द्वीप स्थित कंपनी को 660 करोड रुपये का कर्ज देती है।
- मॉरीशस स्थित डीएच रीन्यूएबल्स कोचर की न्यूपावर में 66 करोड़ रूपया डालती है। यानी कर्ज की राशि का दस फीसदी।
प्रियंका की एंट्री के बाद नए तेवर में कांग्रेस, आंध्र प्रदेश के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी 'एकला चलो' रणनीति पर फोकस
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस महागठबंधन की पिच तैयार करने में जुटी हुई थी. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने अपनी रणनीति को नया आयाम दिया है
नई दिल्ली:
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस महागठबंधन की पिच तैयार करने में जुटी हुई थी. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने अपनी रणनीति को नया आयाम दिया है और एक से अधिक राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल उनमें से एक हैं. कांग्रेस ने बुधवार को आंध्र प्रदेश में इसकी घोषणा भी कर दी. अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने इस संबंध में कहा था कि कांग्रेस आंध्र प्रदेश में सभी 175 विधानसभा सीटों और 25 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी टीडीपी के साथ हमारा गठबंधन केवल राष्ट्रीय स्तर पर है, ऐसे में हम राज्य में टीडीपी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे.'' ओमन चांडी ने कहा कि वे चुनाव की तैयारियों के बारे में चर्चा करने के लिए फिर 31 जनवरी को एकत्र होंगे. उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस ने फरवरी में सभी 13 जिलों में एक बस यात्रा निकालने का निर्णय किया है. इसका मतलब यह निकलता है कि कांग्रेस और टीडीपी के बीच आंध्र प्रदेश में कोई महागठबंधन नहीं होगा. दोनों पार्टियों हाल ही तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में साथ लड़ी थीं, लेकिन चुनाव का नतीजा दोनों पार्टियों के लिए काफी भयानक साबित हुआ. शायद यह वजह है कि दोनों पार्टियां आंध्र प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ना चाहती हैं.
कांग्रेस के लिए टीडीपी तेलंगाना में एक डेड वेट के समान साबित हुई, तो नायडू के लिए आंध्र प्रदेश में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं है. जहां, आंध्र प्रदेश के विभाजन और तेलंगाना के जन्म की अध्यक्षता करने वाली पार्टी के खिलाफ जनता का भारी गुस्सा है. इसके अलावा, विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश में कई रोड शो कर रहे हैं और लोगों का समर्थन भी उन्हें मिल रहा है. लेकिन कांग्रेस और टीडीपी की आपसी समझ को हल्के में नहीं लिया जा सकता.चंद्रबाबू नायडू ने इससे पहले साफ किया था कि कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन केवल तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए था और महागठबंधन राष्ट्रीय स्तर के चुनाव के लिए है. अगर रणनीतिक रूप से देखा जाए तो दोनों पार्टियों के लिए अलग-अलग चुनाव लड़ना ही बेहतर रणनीति होगी और यह जगन मोहन रेड्डी की सीटों की संख्या को कम करते हुए टीडीपी विरोधी वोटों को विभाजित करेगा.
वहीं, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के सवाल पर मायावती-अखिलेश यादव के कैंप ने कहा कि कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ना सबसे ज्यादा बीजेपी को प्रभावित करेगा हमे नहीं. कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने से ब्राह्मण और ठाकुर वोट विभाजित होगा, जो बीजेपी के लिए नुकसानदायक साबित होगा.वहीं, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच किसी भी गठबंधन को लगभग खारिज कर दिया गया है. बंगाल कांग्रेस ममता बनर्जी के साथ किसी भी तरह का गठजोड़ नहीं चाहती है. जबकि राहुल गांधी ने बीते दिनों ममता बनर्जी की विपक्षी एकता रैली को समर्थन दिया था. कोलकाता में आयोजित इस रैली में राहुल गांधी शामिल तो नहीं हुए, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि अभिषेक मनु सिंधवी और मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था.
तृणमूल के लिए पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन एक बोझ है, क्योंकि इसका मतलब यह होगा कि कांग्रेस के साथ सीटों को शेयर करना होगा, जो कि तृणमूल संभवतः अपने दम पर जीतेगी. पश्चिम बंगाल में तृणमूल को कांग्रेस की जरूरत नहीं है, क्योंकि पार्टी यहां अपने दम पर कई सालों से परचम लहरा रही है.उधर, प्रियंका गांधी वाड्रा के कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश -पश्चिम की प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद से कांग्रेस में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है. प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में शामिल होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा था कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर बैकफुट पर नहीं खेलना चाहती वह फ्रंटफुट पर खेलेगी. कांग्रेस ने दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन को अभी नकारा नहीं है. शीला दीक्षित ने इसके निर्देश भी दिए हैं.
कांग्रेस महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ, तमिलनाडु में डीएमके और कर्नाटक में जेडीएस, बिहार में आरजेडी और झारखंड में जेएमएम के साथ गठबंधन की योजना पर काम कर रही है.
गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में दो संदिग्ध गिरफ्तार, आतंकी हमले की रच रहे थे साजिश
जम्मू-कश्मीर के वाकुरा और बाटापोरा निवासियों अब्दुल लतीफ गनी (29) ऊर्फ उमैर ऊर्फ दिलावर और हीलाल अहमद भट (26) को गिरफ्तार किया गया है.
नई दिल्ली:
गणतंत्र दिवस समारोहों (Repubic Day) के दौरान दिल्ली (Delhi) में आतंकवादी हमलों की साजिश बनाने के आरोप में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish E Mohammad) के दो कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के वाकुरा और बाटापोरा निवासियों अब्दुल लतीफ गनी (29) ऊर्फ उमैर ऊर्फ दिलावर और हीलाल अहमद भट (26) को गिरफ्तार किया गया है. स्पेशल सेल के डिप्टी कमीश्नर पीएस कुश्वाह ने बताया कि सैन्य खुफिया तंत्र से सूचना मिली थी कि लक्ष्मी नगर के एक मकान में कुछ संदिग्ध लोग आ-जा रहे हैं. इसी आधार पर 20-21 जनवरी की दरम्यानी रात के दौरान दिलावर को गिरफ्तार किया गया.
उन्होंने बताया कि पुलिस को पता चला था कि दिलावर किसी से मिलने के लिए राजघाट जाने वाला है. उसी के आधार पर बलों की तैनाती कर संदिग्ध सामग्री के साथ उसे गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि दिलावर के पास से 32 बोर की पिस्तौल और 26 कारतूस मिले हैं. जेईएम कमांडरों के तीन स्टांप और अन्य चीजें भी मिली हैं. उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस को दिलावर की पहचान करने में कुछ महीने का वक्त लगा.
अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी हमलों के लिए दिल्ली में कई जगहों की रेकी करने वाले भट को बांदीपोरा से गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि वे जैश के सदस्य हैं और दिलावर आतंकी संगठन का गांदेरबल जिला कमांडर है.
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