'Manikarnika' Movie Review: 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी' में कंगना रनौत (Kangana Ranaut) दोहरी भूमिका में हैं. डायरेक्शन और लीड रोल. जानें कंगना रनौत ने इन दोनों ही किरदारों से कितना इंसाफ किया है.
नई दिल्ली:
Manikarnika: The Queen of Jhansi: सुभद्राकुमारी चौहान की कविता 'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी' को बचपन से सुनते आए हैं और झांसी की रानी की एक इमेज इसी कविता ने हमारे जेहन में बनाई है. लेकिन झांसी की रानी की एक छवि कंगना रनौत (Kangana Ranaut) 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी' में भी लेकर आई हैं. कंगना रनौत ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के किरदार को बखूबी परदे पर उतारा है लेकिन 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी (Manikarnika: The Queen of Jhansi)' इस लेजंडरी कैरेक्टर के साथ इंसाफ करती नजर नहीं आती है और कमजोर डायरेक्शन फिल्म की सबसे बड़ी चूक है. फिल्म के डायरेक्शन को लेकर हुई जंग तो वैसे भी जगजाहिर है और आखिर में कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को कमान अपन हाथों में लेनी पड़ी. कमजोर डायरेक्शन और बचकानी बातें पूरी फिल्म पर हावी रहती हैं. फिल्मों में अंग्रेजों के बोलने के ढंग और अंदाज पर कुछ और काम किया जाना चाहिए वर्ना यह बहुत हास्यास्पद लगता है क्योंकि यह अंदाज अब पुराना हो चुका है.
'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी (Manikarnika: The Queen of Jhansi)' की कहानी मणिकर्णिका के जन्म से शुरू होती है और बचपन में ही ऐलान कर दिया जाता है कि उसकी उम्र लंबी हो न हो लेकिन उसका नाम बड़ा होगा. कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की एंट्री बाघ के शिकार के साथ होती है और कंगना बहुत खूबसूरत भी लगती हैं. झांसी के राजा के लिए मणिकर्णिका को चुना जाता है और शादी पर उसका नाम लक्ष्मीबाई हो जाता है. लेकिन बच्चे के निधन होने की वजह से अंग्रेज झांसी को 'हड़प की नीति' के तहत हड़पने की कोशिश करते हैं और फिर झांसी की रानी ऐलान कर देती है कि वह अपनी झांसी किसी को नहीं देगी. फिल्म की कहानी कनेक्ट नहीं कर पाती है और फर्स्ट हाफ में ढेर सारे गाने और स्लो स्टोरी तंग करती है. झांसी की रानी (Jhansi Ki Rani) के बचपन को दिखाया नहीं गया है. दूसरे हाफ में जंग शुरू होने पर फिल्म जोश भरती है. लेकिन पूरी फिल्म अति नाटकीयता की वजह ये स्टेज प्ले जैसी लगने लगती है. सीन रिपीटिशन भी तंग करता है.
Manikarnika: The Queen of Jhansi: सुभद्राकुमारी चौहान की कविता 'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी' को बचपन से सुनते आए हैं और झांसी की रानी की एक इमेज इसी कविता ने हमारे जेहन में बनाई है. लेकिन झांसी की रानी की एक छवि कंगना रनौत (Kangana Ranaut) 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी' में भी लेकर आई हैं. कंगना रनौत ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के किरदार को बखूबी परदे पर उतारा है लेकिन 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी (Manikarnika: The Queen of Jhansi)' इस लेजंडरी कैरेक्टर के साथ इंसाफ करती नजर नहीं आती है और कमजोर डायरेक्शन फिल्म की सबसे बड़ी चूक है. फिल्म के डायरेक्शन को लेकर हुई जंग तो वैसे भी जगजाहिर है और आखिर में कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को कमान अपन हाथों में लेनी पड़ी. कमजोर डायरेक्शन और बचकानी बातें पूरी फिल्म पर हावी रहती हैं. फिल्मों में अंग्रेजों के बोलने के ढंग और अंदाज पर कुछ और काम किया जाना चाहिए वर्ना यह बहुत हास्यास्पद लगता है क्योंकि यह अंदाज अब पुराना हो चुका है.

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